खाकी के बाद अब संसदीय पारी का आगाज
कोलकाता। पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार ने अपने सार्वजनिक जीवन के एक नए और अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय की शुरुआत की है। सोमवार को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेते हुए उन्होंने अपनी मातृभाषा बांग्ला को चुना, जिसने संसद के उच्च सदन में बंगाल की भाषाई अस्मिता को प्रखरता से रेखांकित किया। खाकी वर्दी में दशकों तक कानून-व्यवस्था संभालने के बाद, राजीव कुमार का सदन में बांग्ला में शपथ लेना न केवल उनके व्यक्तिगत झुकाव को दर्शाता है, बल्कि यह तृणमूल कांग्रेस की उस व्यापक रणनीति का भी हिस्सा है जो बंगाली पहचान और संस्कृति को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता देती है।
राज्यसभा में आयोजित इस गरिमामयी समारोह के दौरान जैसे ही राजीव कुमार ने बांग्ला भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ ली, सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने भी इस सांस्कृतिक जुड़ाव का स्वागत किया। भारतीय पुलिस सेवा के 1989 बैच के अधिकारी रहे राजीव कुमार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का बेहद करीबी और भरोसेमंद माना जाता रहा है।
पुलिस प्रशासन में अपनी गहरी पैठ और रणनीतिक कौशल के लिए मशहूर कुमार अब सदन के भीतर विधायी प्रक्रियाओं और बंगाल से जुड़े नीतिगत मुद्दों पर अपनी राय रखेंगे। उनके साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो ने भी बांग्ला में शपथ लेकर इस भाषाई संदेश को और अधिक मजबूती दी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि राजीव कुमार जैसे अनुभवी प्रशासनिक चेहरे को राज्यसभा भेजना तृणमूल कांग्रेस का एक मास्टरस्ट्रोक है।
इसके जरिए पार्टी न केवल प्रशासनिक अनुभवों का लाभ संसदीय चर्चाओं में लेना चाहती है, बल्कि बांग्ला में शपथ दिलाकर राज्य के मतदाताओं को यह संदेश भी देना चाहती है कि उनके प्रतिनिधि दिल्ली की पंचायत में भी अपनी माटी और भाषा से जुड़े रहेंगे। राजीव कुमार की यह नई भूमिका इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि वे उन चुनिंदा नौकरशाहों में शामिल हैं जिन्होंने सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद राजनीतिक और संसदीय क्षेत्र में इतनी सक्रियता दिखाई है। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि वे राज्यसभा के पटल पर बंगाल के हितों की पैरवी किस प्रकार करते हैं।